Lyrics hanuman chalisa, Sree hanuman chalisa lyrics and Hanuman chalisa Download mp3
1. विवरण' :- हनुमान चालीसा' गोस्वामी तुलसीदास की काव्यात्मक कृति है, जिसमें भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान का गुणगान किया गया है।2. रचनाकार :- गोस्वामी तुलसीदासमूल
3. शीर्षक :- हनुमान चालीसा
4. मुख्यपात्र :- हनुमान
5. विषय :- स्तुति
6. विशेष :-
'हनुमान चालीसा' के नित्य पाठ से साधारण व्यक्ति भी बिना किसी विशेष पूजा-अर्चना के अपनी समस्त परेशानियों से मुक्ति पा सकता है।
7. संबंधित लेख :-
हनुमा, तुलसीदास, श्रीरामश्री जानकारी :- सम्पूर्ण भारत में 'हनुमान चालीसा' का पाठ बेहद लोकप्रिय है, किन्तु विशेष रूप से उत्तर भारत में यह बहुत प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय है। लगभग सभी हिन्दुओं को यह कंठस्थ होती है।
हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध काव्यात्मक कृति है। यह कृति भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान को समर्पित है, जिसमें उनके गुणों आदि का बखान किया गया है। हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु 'हनुमान चालीसा' का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसका पाठ सनातन जगत में जितना प्रचलित है, उतना किसी और वंदना या पूजन आदि में नहीं दिखाई देता। 'श्री हनुमान चालीसा' के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। इसीलिए 'रामचरितमानस' की भाँति यह हनुमान गुणगाथा फलदायी मानी गई है। यह अत्यन्त लघु रचना है, जिसमें पवनपुत्र हनुमान की सुन्दर स्तुति की गई है। बजरंग बली की भावपूर्ण वंदना तो इसमें है ही, साथ ही भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में उकेरा गया है।
Hanuman chalisa lyrics
Shri Guru Charan Sarooja-raj
Nija manu Mukura Sudhaari
Baranau Rahubhara Bimala Yashu
Jo Dayaka Phala Chari
Budhee-Heen Thanu Jannikay
Sumirow Pavana Kumara
Bala-Budhee Vidya Dehoo Mohee
Harahu Kalesha Vikaara...
Jai Hanuman gyan gun sagar
Jai Kapis tihun lok ujagar
Ram doot atulit bal dhama
Anjaani-putra Pavan sut nama...
Mahabir Bikram Bajrang
Kumati nivar sumati Ke sangi
Kanchan varan viraj subesa
Kanan Kundal Kunchit Kesh
Hath Vajra Aur Dhuvaje Viraj
Kaandhe moonj janehu sajai
Sankar suvan kesri Nandan
Tej prataap maha jag vandan...
Vidyavaan guni ati chatur
Ram kaj karibe ko aatur
Prabu charitra sunibe-ko rasiya
Ram Lakhan Sita man Basiya
Sukshma roop dhari Siyahi dikhava
Vikat roop dhari lank jarava
Bhima roop dhari asur sanghare
Ramachandra ke kaj sanvare...
Laye Sanjivan Lakhan Jiyaye
Shri Raghuvir Harashi ur laye
Raghupati Kinhi bahut badai
Tum mam priye Bharat-hi-sam bhai
Sahas badan tumharo yash gaave
Asa-kahi Shripati kanth lagaave
Sankadhik Brahmaadi Muneesa
Narad-Sarad sahit Aheesa...
Yam Kuber Digpaal Jahan te
Kavi kovid kahi sake kahan te
Tum upkar Sugreevahin keenha
Ram milaye rajpad deenha
Tumharo mantra Vibheeshan maana
Lankeshwar Bhaye Sub jag jana
Yug sahastra jojan par Bhanu
Leelyo tahi madhur phal janu...
Prabhu mudrika meli mukh mahee
Jaladhi langhi gaye achraj nahee
Durgaam kaj jagath ke jete
Sugam anugraha tumhre tete
Ram dwaare tum rakhvare
Hoat na agya binu paisare
Sub sukh lahae tumhari sar na
Tum rakshak kahu ko dar naa...
Aapan tej samharo aapai
Teenhon lok hank te kanpai
Bhoot pisaach Nikat nahin aavai
Mahavir jab naam sunavae
Nase rog harae sab peera
Japat nirantar Hanumant beera
Sankat se Hanuman chudavae
Man Karam Vachan dyan jo lavai...
Sab par Ram tapasvee raja
Tin ke kaj sakal Tum saja
Aur manorath jo koi lavai
Sohi amit jeevan phal pavai
Charon Yug partap tumhara
Hai persidh jagat ujiyara
Sadhu Sant ke tum Rakhware
Asur nikandan Ram dulhare...
Ashta-sidhi nav nidhi ke dhata
As-var deen Janki mata
Ram rasayan tumhare pasa
Sada raho Raghupati ke dasa
Tumhare bhajan Ram ko pavai
Janam-janam ke dukh bisraavai
Anth-kaal Raghuvir pur jayee
Jahan janam Hari-Bakht Kahayee...
Aur Devta Chit na dharehi
Hanumanth se hi sarve sukh karehi
Sankat kate-mite sab peera
Jo sumirai Hanumat Balbeera
Jai Jai Jai Hanuman Gosahin
Kripa Karahu Gurudev ki nyahin
Jo sat bar path kare koyi
Chutehi bandhi maha sukh hoyi...
Jo yah padhe Hanuman Chalisa
Hoye siddhi sakhi Gaureesa
Tulsidas sada hari chera
Keejai Nath Hridaye mein dera...
Keejai Nath Hridaye mein dera...
Pavan Tanay Sankat Harana,
Mangala Murati Roop...
Ram Lakhana Sita Sahita
Hriday Basahu Soor Bhoop.
हनुमान चालीसा (Hanuman chalisa lyrics in HIndia)
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥
विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥
लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥
भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥
और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
Meaning of Hanuman chalisa in hindi / हिंदी में हनुमान चालीसा का अर्थ
दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
अर्थ :-
श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।
हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कर दीजिए।
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
अर्थ :-
श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।
हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कर दीजिए।
चौपाई :-
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
अर्थ :-
हनुमान जी की जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
अर्थ :-
हनुमान जी की जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।
चौपाई :-
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
अर्थ :-
हे पवनसुत अंजनीनन्दन! श्रीरामदूत! आपके समान दूसरा कोई बलवान नहीं है ।
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
अर्थ :-
हे पवनसुत अंजनीनन्दन! श्रीरामदूत! आपके समान दूसरा कोई बलवान नहीं है ।
चौपाई :-
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
अर्थ :-
हे महावीर बजरंगबली! आप तो विशेष पराक्रमवाले है । आप दुर्बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धिवालों के सहायक है ।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
अर्थ :-
हे महावीर बजरंगबली! आप तो विशेष पराक्रमवाले है । आप दुर्बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धिवालों के सहायक है ।
चौपाई :-
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।।
अर्थ :-
आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभीत हैं ।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।।
अर्थ :-
आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभीत हैं ।
चौपाई :-
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेउ साजै॥
अर्थ :-
आपके हाथमें बज्र और ध्वजा हैं तथा कांधे पर मूंज जनेऊ की शोभा है।
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेउ साजै॥
अर्थ :-
आपके हाथमें बज्र और ध्वजा हैं तथा कांधे पर मूंज जनेऊ की शोभा है।
चौपाई :-
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥
अर्थ :-
हे शंकर के अवतार, हे केशरी-नन्दन, आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥
अर्थ :-
हे शंकर के अवतार, हे केशरी-नन्दन, आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।
चौपाई :-
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
अर्थ :-
आप प्रकाण्ड विद्यानिधान हैं, गुणवान और अत्यंत कार्यकुशल होकर श्रीराम-काज करने के लिए उत्सुक रहतें हैं ।
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
अर्थ :-
आप प्रकाण्ड विद्यानिधान हैं, गुणवान और अत्यंत कार्यकुशल होकर श्रीराम-काज करने के लिए उत्सुक रहतें हैं ।
चौपाई :-
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
अर्थ :-
आप श्रीराम के चरित्र सुनने में आनन्द-रस लेते हैं । श्रीराम सीता और लक्ष्मण आपके हृदयमें बसते हैं।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
अर्थ :-
आप श्रीराम के चरित्र सुनने में आनन्द-रस लेते हैं । श्रीराम सीता और लक्ष्मण आपके हृदयमें बसते हैं।
चौपाई :-
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
अर्थ :-
आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
अर्थ :-
आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।
चौपाई :-
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
अर्थ :-
आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्देश्यों को सफल बनाया।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
अर्थ :-
आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्देश्यों को सफल बनाया।
चौपाई :-
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
अर्थ :-
आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
अर्थ :-
आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।
चौपाई :-
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
अर्थ :-
हे पवनसुत! श्रीरामचंद्रजी ने आपकी बहुत प्रंशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे भाई हो।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
अर्थ :-
हे पवनसुत! श्रीरामचंद्रजी ने आपकी बहुत प्रंशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे भाई हो।
चौपाई :-
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
अर्थ :-
श्रीराम ने आपको यह कहकर ह्रदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजार-मुखसे सराहनीय है ।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
अर्थ :-
श्रीराम ने आपको यह कहकर ह्रदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजार-मुखसे सराहनीय है ।
चौपाई :-
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
अर्थ :-
श्रीसनक, श्रीसनातन, श्रीसनन्दन, श्रीसनत्कुमार आदि मुनि, ब्रम्हा आदि देवता, नारदजी, सरस्वतीजी, शेषनागजी आदि आपके यशको पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते ।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
अर्थ :-
श्रीसनक, श्रीसनातन, श्रीसनन्दन, श्रीसनत्कुमार आदि मुनि, ब्रम्हा आदि देवता, नारदजी, सरस्वतीजी, शेषनागजी आदि आपके यशको पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते ।
चौपाई :-
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
अर्थ :-
यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि, विद्वान, पंडित, या कोई भी आपके यशको पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
अर्थ :-
यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि, विद्वान, पंडित, या कोई भी आपके यशको पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।
चौपाई :-
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
अर्थ :-
आपने सुग्रीवजी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया जिसके कारण वे राजा बने ।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
अर्थ :-
आपने सुग्रीवजी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया जिसके कारण वे राजा बने ।
चौपाई :-
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
अर्थ :-
आपके उपदेश का विभीषण ने पूर्णत: पालन किया, इसी कारण वे लंका के राजा बनें, इसको सब संसार जानता है ।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
अर्थ :-
आपके उपदेश का विभीषण ने पूर्णत: पालन किया, इसी कारण वे लंका के राजा बनें, इसको सब संसार जानता है ।
चौपाई :-
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
अर्थ :-
जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
अर्थ :-
जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।
चौपाई :-
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
अर्थ :-
आपने श्रीरामचंद्रजी की अंगूठी मूंह में रखकर समुद्र को पार किया परन्तु आपके लिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं है ।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
अर्थ :-
आपने श्रीरामचंद्रजी की अंगूठी मूंह में रखकर समुद्र को पार किया परन्तु आपके लिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं है ।
चौपाई :-
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
अर्थ :-
संसार में जितने भी कठीन से कठीन काम हैं, वे सभी आपकी कृपा से सहज और सुलभ हो जाते हैं ।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
अर्थ :-
संसार में जितने भी कठीन से कठीन काम हैं, वे सभी आपकी कृपा से सहज और सुलभ हो जाते हैं ।
चौपाई :-
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
अर्थ :-
श्री रामचंद्रजी के द्वार के आप रखवाले हैं , जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिल सकता । (अर्थात बिना हनुमान जी को प्रसन्न किये राम जी को नहीं पाया जा सकता)
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
अर्थ :-
श्री रामचंद्रजी के द्वार के आप रखवाले हैं , जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिल सकता । (अर्थात बिना हनुमान जी को प्रसन्न किये राम जी को नहीं पाया जा सकता)
चौपाई :-
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।
अर्थ :-
जो आप में शरण लेते हैं वे सभी खुशी का आनंद लेते हैं। यदि आप रक्षक हैं, तो डरने के लिए क्या है?
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।
अर्थ :-
जो आप में शरण लेते हैं वे सभी खुशी का आनंद लेते हैं। यदि आप रक्षक हैं, तो डरने के लिए क्या है?
चौपाई :-
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
अर्थ :-
आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
अर्थ :-
आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।
चौपाई :-
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै।।
अर्थ :-
आपका ‘महावीर’ हनुमानजी का नाम सुनकर भूत-पिसाच आदि दुष्ट आत्माएँ पास भी नहीं आ सकती ।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै।।
अर्थ :-
आपका ‘महावीर’ हनुमानजी का नाम सुनकर भूत-पिसाच आदि दुष्ट आत्माएँ पास भी नहीं आ सकती ।
चौपाई :-
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
अर्थ :-
आपका निरंतर जप करने से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और सब कष्ट दूर हो जाते हैं।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
अर्थ :-
आपका निरंतर जप करने से सब रोग नष्ट हो जाते हैं और सब कष्ट दूर हो जाते हैं।
चौपाई :-
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
अर्थ :-
हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
अर्थ :-
हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।
चौपाई :-
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।
अर्थ :-
तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।
अर्थ :-
तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।
चौपाई :-
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।
अर्थ :-
जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।
अर्थ :-
जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।
चौपाई :-
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
अर्थ :-
चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
अर्थ :-
चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।
चौपाई :-
साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अर्थ :-
हे श्री राम के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।
साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अर्थ :-
हे श्री राम के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।
चौपाई :-
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
अर्थ :-
आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है। (आठ सिद्धियां –
1.) अणिमा- जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है।
2.) महिमा- जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।
3.) गरिमा- जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।
4.) लघिमा- जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।
5.) प्राप्ति- जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।
6.) प्राकाम्य- जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता है, आकाश में उड़ सकता है।
7.) ईशित्व- जिससे सब पर शासन का सामर्थ्य हो जाता है।
8.) वशित्व- जिससे दूसरों को वश में किया जाता है।)
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
अर्थ :-
आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है। (आठ सिद्धियां –
1.) अणिमा- जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है।
2.) महिमा- जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।
3.) गरिमा- जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।
4.) लघिमा- जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।
5.) प्राप्ति- जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।
6.) प्राकाम्य- जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता है, आकाश में उड़ सकता है।
7.) ईशित्व- जिससे सब पर शासन का सामर्थ्य हो जाता है।
8.) वशित्व- जिससे दूसरों को वश में किया जाता है।)
चौपाई :-
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
अर्थ :-
आप निरन्तर श्री रघुनाथजी की शरण में रहते हैं, जिससे आपके पास वृद्धावस्था और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम-नाम रुपी औषधी है ।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
अर्थ :-
आप निरन्तर श्री रघुनाथजी की शरण में रहते हैं, जिससे आपके पास वृद्धावस्था और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम-नाम रुपी औषधी है ।
चौपाई :-
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अर्थ :-
आपका भजन करने से श्रीरामजी प्राप्त होते हैं और जन्म जन्मांतर के दु:ख दूर होते हैं।
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अर्थ :-
आपका भजन करने से श्रीरामजी प्राप्त होते हैं और जन्म जन्मांतर के दु:ख दूर होते हैं।
चौपाई :-
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
अर्थ :-
अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
अर्थ :-
अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे।
चौपाई :-
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
अर्थ :-
हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
अर्थ :-
हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।
चौपाई :-
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
अर्थ :-
हे वीर हनुमानजी ! जो आपका स्मरण करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीडा मिट जाती हैं।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
अर्थ :-
हे वीर हनुमानजी ! जो आपका स्मरण करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीडा मिट जाती हैं।
चौपाई :-
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
अर्थ :-
हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
अर्थ :-
हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।
चौपाई :-
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।
अर्थ :-
जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।
अर्थ :-
जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा।
चौपाई :-
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
अर्थ :-
भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
अर्थ :-
भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
चौपाई :-
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
अर्थ :-
हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
अर्थ :-
हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।
दोहा :
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
अर्थ :-
हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
अर्थ :-
हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
Hanuman chalisa meaning in gujarati / गुजराती में हनुमान चालीसा का अर्थ
ટુહ: -
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मानव मुकुरु सुधार। બરનૌન રણ્ડબર બિમલ જાસુ, જો दायकु फल चारि।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। ભારપૂર્વકની વાત દેહુ મોહિં, હરુહ કલેસ વેચનાર.
અર્થ: -
શ્રી ગુરુ મહારાજની દ્વિતીય દુ मनખની ધૂનમાંથી તમારી મનની નોંધણી શ્રી રણકવીર નિર્મલ યસ વર્ણનાત્મક, જે ચરોણ ધર્મ, અર્થ, કામ અને મોક્ષને પ્રાપ્ત થાય છે.
हे पवन कुमार! আমি আশা করি તમે જાણો છો કે મારા શરીર અને ચિંતન નિશ્ચિત છે. મને શારીરિક દબાણ, સદ્બુદ્ધિ અને જ્ दीાન દિશિઓ અને મારું દુ वખ અને ક્ષતિઓ દૂર કરે છે.
ચોપાई: -
જય હનુમાનજ્ गु ગુન સાગર. જય કીપીસ તિહૂં લોક ઉજાગર.
અર્થ: -
હનુમાન જી ની જય હો. તમારા જ્ ज्ञानાન અને ગુણ અથહા છે. हे कपीश्वर! “જય હો! ત્રણ લોકો, સ્વર્ગ લોક, ભૂલોક અને પાતાળ લોકોમાં તમારી કીર્તિ છે.
ચોપાई: -
રામબેન અતુલિત દબાણ ધમા. અંજની-હા પાવનસુત નામા.
અર્થ: -
हे पवनसुत अंजनिनन्दन! શ્રીરામ! તમારા સમાન બીજા કોઈ બળવાન નથી.
ચોપાई: -
મહાબીર વેચનાર કુમત નિવાર સુમસત સગી।
અર્થ: -
हे महावीर बजरंगबली! તમે તો વિશેષપણે જાણો છો. તમે કમનસીબી દૂર છો અને કુશળતાપૂર્વકની સેવાઓ છે.
ચોપાई: -
कंचन बरन बिराज सुबेसा। કાનન કુંડલ કુંબીત કેસા.
અર્થ: -
તમે સુનહલે રંગ, સુંદર કપડા, કાનુનો માં કોંડલ અને રોનઘરાલે બાળો થી સુશોભિતા.
ચોપાई: -
हाथ बज्र अरु अरुजा बिराजै। કાંડે મૂંજ જનેઉ સાસાઈ॥
અર્થ: -
તમારો હાથ બજેટ અને અવાજ અને કાંડે પર મૂંજ જનેઉની શોભા છે.
ચોપાई: -
शंकर सुवनसेसरी नंदन। ઝડપી પ્રપટ મહા જગ બંધન॥
અર્થ: -
તે શંકરનો અવતાર, હેશ્રી-નંદન, તમારો વિશ્રામ અને મહાન સત્યની દુનિયામાં વંદના છે.
ચોપાई: -
विद्यावान गुनी अति चातुर। રામ કાજ કરિબેનો આત્મર.
અર્થ: -
તમે વિદ્યાપીઠો છો, ગુણવાન છો અને અત્યંત કાર્યકારી શ્રીરામ-કાજ કરવા માટે આનંદપૂર્વક રહો છો.
ચોપાई: -
प्रभु चरित्रहितबे रसिया। રામ લકન સીતા મન બસિયા.
અર્થ: -
તમે શ્રીરામના ચારિત્ર સુન્ન છો. શ્રીરામ સીતા અને લક્ષ્મણ તમારા હ્રદય બસ.
ચોપાई: -
સુક્ષ્મ રૂપે સહિં બતાવા। વેપારી તરીકે લીંક જરાવા.
અર્થ: -
ખૂબ જ નાના ધરણાં સીતા જી બતાવી અને ભयंकर તરીકે લંકા કો સળગાવી.
ચોપાई: -
ધરમ અસહિ સન્હરે। રામચંદ્રના કાજ સંવરે.
અર્થ: -
વિશ્વ વિક્રાલ ધારણા રાક્ષસોન્સ મારા અને શ્રી રામચંદ્ર જી ઉદઘાટન
ચોપાई: -
લાય સજીવન લકન જિયા. શ્રીરંગીબીર હરી ઉર લાયે.
અર્થ: -
વિશ્વ સંજીની બુટ્ટી લકર લક્ષ્મણ જી કોલસા માં શ્રી શ્રી રંગવીર ને હર્ષિત નો ઉલ્લેખ કર્યો હતો
ચોપાई: -
রঙ্গপতিની ছোট্ট বড় বড়। તું મમ પ્રિય ભતિહિ સમ ભાઈ।
અર્થ: -
હે पવનસूट! શ્રીરામચંદ્રજી તમારી ખૂબ જ નિંદા અને કહ્યું કે તમે મારા ભરત જેવા ભાઈ છો.
ચોપાई: -
સહસ બદાન તમે જશો ગામડા. અસ કહિ શ્રીपति કોઠ લગાવ.
અર્થ: -
શ્રીરામ તે તમે કકર હ્રદયને લગાવ્યા છો કે તમારી યુरा यश-मुखसे सराहनीय है.
ચોપાई: -
सनकादिक ब्रह्मादि मुनिसा। नारद सारद सहित अहीसा।
અર્થ: -
श्रीसनक, श्रीसनात्तन, श्रीसनन्दन, श्रीसनत्कुमार आदि मुनि, ब्रम्हा आदि देवता, नारदजी, सरस्वतीजी, शेषनागजी इत्यादि पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।
ચોપાई: -
જામ કુબેર દિગપાલ આવે છે. કબીબી કોબિદ કહિ તે કહો તે।
અર્થ: -
यમરાજ, કુબેર વગેરે બધા જ દિશાઓના રક્ષક, કવિ, વિद्वान, પંડિત, અથવા કોઈપણ રીતે તમારો યશ વર્ણવતા નથી.
ચોપાई: -
તમે ઉપકાર સુગ્રીવહિં કિન્તુ। રામ મિલે રાજ પદ દિને.
અર્થ: -
જીવન સુજીવજી શ્રીરામ થી મિલ્કર ઉપકાર્ડ કારણોસર રાજા બન્યા.
ચોપાई: -
તમે મ્રિ લંકસ્વર છે
અર્થ: -
તમારા ઉપદેશનું વિહિષણ પૂર્ણ કર્યું: અનુસરે છે, તે કારણ છે કે લંકાના રાજા બન્યા છે, આ બધા વિશ્વના જીવન છે.
ચોપાई: -
જુગ સહસ્ર જજન પર ભानु. લિલિઓ તાહિ મધુર ફળ જાનુ.
અર્થ: -
જે સૂર્ય એટલા યોજન પર છે તે સમયે યુઝન યુગ લગાવો. બે યુઝન યોજન પર સ્થિત સૂર્યનો સમય એક મીઠા ફળ સિંચર નિગલ છે.
ચોપાई: -
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। જલધિ
અર્થ: -
જીવન શ્રીરામચંદ્રજીની અંગૂઠી મૂહનમાં રીપર સમુદ્રમાં પસાર થવું તમારા માટે કોઈ આશ્ચર્ય નથી.
ચોપાई: -
दुर्गम काज जगत के जेते। સુગમ અનુસરણ
અર્થ: -
વિશ્વમાં વિશિષ્ટ પણ પ્રશ્નોત્તરીઓ કરતા હોય છે, પરંતુ તે આપણી બધી કૃષ્ણામાંથી છે અને સુલભ હો છે.
ચોપાई: -
રામ દુઆરે તું રાખાવ. न न आज्ञा आज्ञा बि बि बि बि बि
અર્થ: -
શ્રી રામચંદ્રજીના બીજા દરે તમે સંભાળી શકો છો, તેના કોઈ આદેશ વિના કોઈ પ્રવેશ મેળવશો નહીં. (બરાબર હનુમાન જી પ્રસ્તુત કૃત્યો રામ જીવો નહીં)
ચોપાई: -
બધી સુખ લહાઇ તારી સરના. તમે રક્ષક કહુનો ભય ના.
અર્થ: -
તમે શરણાગતિ કરી શકો છો, તે આનંદનો આનંદ છે. જો તમે રક્ષક છો, તો ડર માટે શું છે?
ચોપાई: -
તમે तेज सम्हारो તમેै। ત્રણે લોક હંક તન્ કાન્દા।
અર્થ: -
તમારા સીમ્યો તમારો કોઈ વાંધો નહીં, તમારી ગર્જનાથી ત્રણેય લોક કાંપો છે.
ચોપાई: -
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। મહાવીર જ્યારે નામ સુન્નૈ.
અર્થ: -
તમારા ‘મહાવીર’ હનુમાનજીનું નામ સુન્કર ભૂત-પિસાચ
ચોપાई: -
નાસાઈ રોગ હરૈ પીરા. જપત સદા હનુમત બીરા.
અર્થ: -
તમારા હંમેશાં જપમાંથી બધા જ રોગ દૂર થાય છે અને બધા સમય દૂર રહે છે.
ચોપાई: -
સંકટ મન ક્રમ વાંચન ધ્યાન લાવા.
અર્થ: -
હે હનુમાન જી! વિચારો, કર્મ કરો છો અને બોલો છો, જિનકા પર ધ્યાન આપો છો, તમને બધી મુશ્કેલીઓમાંથી છુપાવો છો.
ચોપાई: -
બધાં રામ તાપસ રાજા. શિષ્યો કાજ સકલ તમે સાજા.
અર્થ: -
દર્શન રાજા શ્રી રામચંદ્ર જી શ્રેષ્ઠ છે, તેમના તમામ કાર્યોનો સમયગાળો કરવામાં આવે છે.
ચોપાई: -
મનોરંજન સોઇ અમિત જીવન ફળ પાવા.
અર્થ: -
તે તમારી કૃષ્ણ છે, તે કોઈ પણ અભિવ્યક્તિ નથી જે તેના જીવનમાં કોઈ સીમા નથી.
ચોપાई: -
ચરોન્સ જગ પરેત તારા. શિયાળુ જગત ઉियારા.
અર્થ: -
ચરો યુગન્સ સટુગ, ત્રેતા, દ્વ્પર અને કાલિયુગમાં તમારી ઇચ્છા ફેલાઈ છે, जगत में उसकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है.
ચોપાई: -
સાધુ-સંત તમે રખાવો. અસુર નિકંદ રામ દુલારે.
અર્થ: -
હે શ્રી રામ ની દુલારે! તમે સજ્જનની રક્ષા કરો છો અને સંમતિ આપો છો.
ચોપાई: -
અશિષ્ટ સમૃદ્ધિ અસ બાર્ દીન જાનકી માતા.
અર્થ: -
"માતા માતા શ્રી જાણે છે તેવું વરદાન મળ્યું છે, જ્યારે તમે કોઈક આઠ સિદ્ધાંતો અને નોકરીની સલાહ આપી શકો છો. (અઠવાડિયાઓ -
1.) અણિમા- ભાઈ સાધક કોઈ પ્રાર્થના કરતા નથી અને માધ્યમથી પ્રવેશ લે છે.
2.) પ્રકાશ- પછી યોગી તમારી ખૂબ મોટી રચના કરો.
).) સિંમા-ભાઈ સાધક તમારી જાતને બહુ મોટો બનાવ્યો છે.
).) લશ્મા-જીવતી બહુ ઓછી હળવા બનાવો.
)) પ્રમાણપત્ર
).) પ્રજ્ जिससेાવાન - તે સમયે તે પૃથ્વી પર સમાપ્ત થઈ શકશે, આકાશમાં ઉડતા રહેશે નહીં.
7.) ઇશ્વરેશન - ભાઈ બધા રાજકારણના સમર્થ છે.
8.) વશ્વ-બેકર્સ વ वશમાં દાખલ થયા.)
ચોપાई: -
રામ રસાયણ તમે પાસા. સદા રહો રંગાપતિ દાસા.
અર્થ: -
તમે સંત શ્રી રણજીનાથની શરણાગતિ છે, તે સમયે તમારી ભૂમિકા અને અસ્થિર રોગોના નામ રામ નામ છે
ચોપાई: -
તમે ગીત રામ કો પાવા. જનમ-જનમનું દુ बખ બિસરાવૈ.
અર્થ: -
તમારા ગીતોથી શ્રીરામજી પ્રાપ્ત થાય છે અને જન્મદિવસની દુ: ખ દૂર થાય છે.
ચોપાई: -
अन्ततः रंगेबर पुर जाई। જન્મદિવસ હરિ-ભક્ત જણાવ્યું.
અર્થ: -
છેવટે શ્રી શ્રીગન્નાથ જીનો ધૂમકો છે અને તે પછી તે જન્મ લેશે તો ભક્તિનો છે અને શ્રી રામ ભક્ત કહલાંગે છે.
ચોપાई: -
देव देवता चित्त न धरई। હનુમત સેઇ સર્બ સુખ કરો.
અર્થ: -
હે હનુમાન જી! તમારા સર્વિસથી લઈને તમામ પ્રકારની સુખ પ્રાપ્ત થાય છે, ફરી કોઈક ભગવાનની જરૂરિયાત રહેતી નથી.
ચોપાई: -
સંકટ કટાઇ મિતા બધા પીરા. સુમિર હનુમાત્ બલબીરા.
અર્થ: -
હે વીર હનુમાનજી! તમારી સ્મૃતિ છે, અને તમામ મુશ્કેલીઓ છે અને બધા પીડા મિટ જાતિઓ છે.
ચોપાई: -
જૈ જૈ હનુમાન ગોસાઈન। કૃપા કરુ ગુરુદેવ ના નાં।
અર્થ: -
હે ભગવાન હનુમાન જી! તું જય છે, જય છે, જય છે! તમે મુઝ પર કૃપાલુ શ્રી ગુરુ જી સમાન કૃપાની.
ચોપાई: -
કોઈ સત્ય છૂટિ બંધી મહા સુખ હોઇ।
અર્થ: -
આ કોઈ હનુમાન ચાલીસાનો સમય છે અને તે બધા બંધનોથી છૂટાછવાયા છે અને તે પરમાનંદ બેગા છે.
ચોપાई: -
તે વાંચો હનુમાન ચાલિસા. હા સમૃદ્ધિ સાખી ગૌરીસા.
અર્થ: -
ભગવાન શંકર તે હનુમાન ચાલીસા લખવા, તેથી તે સાક્ષી છે, જે તે વાંચે છે અને નિશ્ચ્ય તે પ્રાપ્ત થાય છે.
ચોપાई: -
તુલસીદાસ સદા હરિ ચેરા. કીજાઇ નાથ હ્રદય મંગળ ડેરા.
અર્થ: -
હે નાથ હનુમાન જી! તુલસીદાસ સદા હી શ્રી રામ કાદા છે. તેથી તમે હ્રદયમાં રહેવા માંગો છો.
ટુહ:
પવન તનય સંકટ હરન, મંગળ મુરતિ રૂપે. રામ લકન સીતા સમાવેશ, હ્રદય બસહુ સુર ભૂપ.
અર્થ: -
હે સંકટ મોચન પવન કુમાર! તમે આનંદ મંગળનું સ્વરૂપ છે. हे देवराज! તમે શ્રી રામ, સીતા જી અને લક્ષ્મણ સહિત મારા હ્રદયમાં રહેશો.




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